72-Hour Website
ऐसी वेबसाइट जो ख़ुद बेचती है। तीन दिन में। वरना मुफ़्त।
₹49,000 + GST में पूरी वेबसाइट — लिखी हुई, आपके काम से भरी हुई, और आपके अपने डोमेन पर तीन दिन में ज़िंदा। ₹5,000 वाली वेबसाइट संपत्ति नहीं होती; वो एक बोझ होती है जिसका डोमेन नाम होता है। ख़रीदने से पहले ₹100 में अपनी वेबसाइट देख लीजिए।
Preview ₹100 (GST सहित) — बिल में एडजस्ट
डेमो
Ek panna, aapka logo, kuch photo. Bas.
Hosting aur domain toh har website ka lagta hai. Sawaal yeh hai ki badle mein kuch aata hai ya nahi.
Kuch likha hi nahi jo kisi ko hilaye.
Na dhaancha, na raftaar, na koi jawab.
Yeh sampatti nahi hai. Yeh bojh hai jiska domain naam hai.
Aap batate ho. Voice note bhi chalega.
Panne, likhaai, aapka kaam andar.
Design, photo, WhatsApp, form.
Aapke domain par. Logins aapke.
Nashik ka interior kaam, waqt par.
18 saal ka kaam, 400+ ghar. Dekhiye kya banaya hai.
WhatsApp par baat karoGhadi shuru. Aapko bas batana hai — baaki hum karte hain.
Der hui? Yeh kaam FREE. Likh ke.
AAPKA APNA ACCOUNT — HAMESHA KE LIYE
Kuch bhi kharidne se pehle aapka login banta hai. Phir sab kuch wahin se.
Website, NFC card, audit, ads — jo bhi liya hai, sab isi panel mein. Kis cheez ka kya haal hai, ek nazar mein.
Site chalu hote hi samajh aata hai ki yahan yeh hona chahiye tha. Saat din tak jitna kehna ho kaho. Koi ginti nahi.
Uske baad jo bhi badalna ho, wahin se kaho — daam pehle dikhega, baad mein bill nahi aayega. Naya product bhi wahin se.
Har invoice, har payment, har delivery ki taareekh — sab panel mein. Kisi se maangna nahi padta.
Ek baar bana, hamesha rahega. Aage jo bhi digital kaam ho, isi login se.
Site chal rahi hai aur ab SEO chahiye? Ya card ki link badalni hai? Wahin se, bina naya khaata banaye.
Agency ke paas jaana matlab intezaar — phone, follow-up, "dekhta hoon". Yahan aapke haath mein panel hai.
क्या यह कहानी जानी-पहचानी है?
- जो वेबसाइट कुछ बेचती नहीं, वो संपत्ति नहीं — बोझ है। पैसे दिए, हर साल देते हैं, और एक ग्राहक नहीं आया।
- चार महीने पहले एजेंसी को फ़ोन किया था। दूसरा ड्राफ़्ट अब तक नहीं आया।
- हर कोई यही कहता है — "निर्भर करता है", "लगभग", "देखते हैं"। तारीख़ कोई नहीं देता।
- पड़ोसी की साइट आपसे बेहतर नहीं है। बस ज़िंदा है, और आपकी नहीं।
यह आपके लिए है, अगर
- दो साल से वेबसाइट बनवाने की सोच रहे हैं और हर बार कुछ आ जाता है।
- एक बार पैसे देकर धोखा खा चुके हैं — महीनों इंतज़ार, और नतीजा शून्य।
- आपका काम दिखाने लायक है और दिखाने की जगह नहीं है।
- आपको तारीख़ चाहिए, लिख कर — किसी से जो उस पर टिके।
यह आपके लिए नहीं है, अगर
- आपको बाज़ार की सबसे सस्ती साइट चाहिए। ये वो नहीं है, और हम अभी बता देना बेहतर समझते हैं।
- आप छह हफ़्ते तक मन बदलते रहना चाहते हैं। हम तेज़ इसलिए हैं क्योंकि पहले बात तय होती है।
काम कैसे होता है
- 1
₹100 में अपनी साइट देखिए
आपके अपने कारोबार पर बनी असली झलक — आपका काम, आपका शहर, आपका नाम। कोई टेम्पलेट नहीं। ये ₹100 आख़िरी बिल में घट जाते हैं।
- 2
एक बार बात
वॉइस नोट भी चलेगा। आप क्या करते हैं, किसके लिए, और साइट से क्या करवाना है।
- 3
घड़ी चालू
जैसे ही आपसे सामग्री और मंज़ूरी मिली, 72 घंटे शुरू — और आप उसे चलते हुए देख सकते हैं।
- 4
साइट ज़िंदा
आपके अपने डोमेन पर, आपके नाम, लॉगिन आपके हाथ में। देर हुई तो पैसे नहीं।
हाथ में क्या आएगा
- पूरी वेबसाइट — पन्ने लिखे हुए, आपका काम अंदर, ख़ाली जगह नहीं।
- डोमेन और होस्टिंग आपके नाम पर, हर लॉगिन आपके हाथ में।
- मोबाइल पहले — आपके ज़्यादातर ग्राहक लैपटॉप पर कभी नहीं देखेंगे।
- संपर्क, WhatsApp और फ़ॉर्म पहले घंटे से चालू।
- Google और AI दोनों पढ़ सकें — ढाँचा, रफ़्तार, schema सही।
- अपना ID-पासवर्ड — पहले सात दिन जितने बदलाव चाहिए, मुफ़्त।
आम तरीक़ा बनाम हमारा
वक़्त पर, वरना फ्री।
पैसे लेने से पहले तारीख़ देते हैं। चूके तो बनाने के पैसे नहीं — छूट नहीं, क्रेडिट नहीं, मुफ़्त। हम तारीख़ इसलिए देते हैं क्योंकि निभा सकते हैं, और एक प्रोजेक्ट खोना मंज़ूर है, वादा खोना नहीं।
72 घंटे। एक तारीख़ जिस पर आप हमें पकड़ सकें।
- बेचने के लिए बनी है, सिर्फ़ होने के लिए नहीं — हर पन्ना ग्राहक को कॉल, मैसेज या ख़रीद तक ले जाता है।
- एक तारीख़ जिस पर आप योजना बना सकें — कार्ड पर छपवाइए, ग्राहक को बताइए।
- ₹100 में पहले देख लीजिए, और वो आख़िरी बिल में घट जाते हैं।
- होस्टिंग हम सँभालते हैं — सर्वर का झंझट आपका नहीं। अपना सर्वर चाहिए तो वो भी ले सकते हैं।
- पूरी तरह आपकी — डोमेन, सामग्री, लॉगिन। कुछ बंधक नहीं।
- बदलाव बाद में तेज़ होते हैं, क्योंकि साइट हमने ही बनाई है।
आपके सवाल
₹5,000 में भी तो वेबसाइट मिलती है। ₹49,000 क्यों?
मिलती है, और बहुतों ने ली है। जो मिलता है वो एक पन्ना है — टेम्पलेट, आपका लोगो, कुछ स्टॉक फ़ोटो, और ऐसा कुछ नहीं लिखा जो किसी को हिलाए। हर साल होस्टिंग और रिन्यूअल का ख़र्चा देता है और बदले में कुछ नहीं। वो सस्ती वेबसाइट नहीं, वो बोझ है जिसका बिल आता रहता है। हम ऐसी साइट बनाते हैं जिसका काम बेचना है। अगर वो नहीं होता, तो दाम कभी समस्या था ही नहीं।
72 घंटे किस पल से?
जिस पल आपसे सब मिल जाए — सामग्री, फ़ोटो, मंज़ूरी। घड़ी तभी शुरू होती है और आप उसे चलते देख सकते हैं। आपकी तरफ़ का इंतज़ार उसमें नहीं गिना जाता।
"देर हुई तो मुफ़्त" का असल मतलब?
तय समय चूके तो बनाने के पैसे नहीं लेते। छूट नहीं, क्रेडिट नहीं। मुफ़्त।
₹100 वाली झलक क्या है?
आपके अपने कारोबार पर बनी असली झलक, ताकि आप कल्पना करने के बजाय देख सकें। ₹100 लगते हैं, और आगे बढ़ने पर वो आख़िरी बिल में घट जाते हैं।
सामग्री मुझे लिखनी पड़ेगी?
नहीं। अपने शब्दों में बता दीजिए — वॉइस नोट भी चलेगा — लिखना हमारा काम है। हर लाइन आप मंज़ूर करते हैं।
बाद में बदलाव करने हों तो?
आपको अपना ID-पासवर्ड मिलता है। पहले सात दिन जितने बदलाव चाहिए, मुफ़्त — कोई गिनती नहीं। उसके बाद वहीं से कहिए; दाम पहले दिखता है, बाद में बिल नहीं आता।
तीन दिन बाद, या एक साल बाद।
जो वेबसाइट आप बनवाने की सोच रहे हैं, उसका अब तक कोई ख़र्चा नहीं हुआ — और यही असली दिक़्क़त है। हर हफ़्ते कोई उस कारोबार को चुन लेता है जो खोजने पर मिल गया। ₹100 में अपनी देख लीजिए।
Preview ₹100 (GST सहित) — बिल में एडजस्ट